कौन होगा रोसड़ा का तारणहार या यूं ही होता रहेगा इमोशनल अत्याचार
ROSERA: ऐतिहासिक शहर रोसरा की लगातार उपेक्षा हो रही है अब रोसड़ा की उपेक्षा को लोग सहने को तैयार नहीं है।रोसड़ा क्षेत्र के लोग अपनी मांगों को लेकर आर पार के मूड में नजर आ रहे हैं। आम आदमी से लेकर राजनीतिक दलों के नेता तथा कार्यकर्ता रोसड़ा के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। रोसरा की उपेक्षा कोई नई बात नहीं है । चाहे रोसड़ा को अब तक जिला नहीं बनाए जाने का मामला हो या फिर रोसड़ा संसदीय क्षेत्र को विलोपित किया जाना। हद तो तब हो गई जब रोसड़ा को जाम से निजात दिलाने वाला बाईपास भी उजियारपुर संसदीय क्षेत्र में चला गया। वहीं रुसेरा घाट रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन की ठहराव जैसे सामान्य मांग के लिए भी जनता को सड़क पर आने की नौबत आन पड़ी है। रोसरा की अनदेखी की वजह एक मजबूत इच्छा शक्ति वाले नेतृत्वकर्ता का नहीं होना रहा है। वहीं स्थानीय नेतृत्व पिछलग्गू बनकर ही खुश है।अब यक्ष प्रश्न यह है कि कौन होगा रोसरा का तारणहार या फिर ऐसे ही होता रहेगा इमोशनल अत्याचार! रोसड़ा की उपेक्षा वर्षों पुरानी है 1993 ईस्वी में रोसरा को जिला बनाने की निकली अधिसूचना ठंडे बस्ते में डाल दी गई। यहां के लोगों ने इसे सह लिया। हालांकि जिले की मांग को लेकर लगातार आंदोलन चलता रहा। मानव श्रृंखला से लेकर अनशन तक किया गया।लेकिन सरकार के कान पर जू तक नहीं रेंगी।राजनीतिक दलों के नेता चुनाव के समय इसे जरूर भुनाते रहे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2011 की विकास यात्रा के दौरान रोसड़ा को जिला बनाए जाने की बात कही थी। क्या कारण है कि बिहार जैसे राज्य में पिछले 25 सालों में एक भी नए जिला का गठन नहीं किया गया है। रोसड़ा जैसा पिछड़ा क्षेत्र सरकार की अटपटी नीति का शिकार होकर जिला बनने की बाट जोह रहा है। 2008 के परिसीमन आयोग में सदस्य रहे नेताओं ने अपने स्वार्थ की खातिर रोसरा संसदीय क्षेत्र की बलि चढ़ा दिया।रोसरा संसदीय क्षेत्र का नामोनिशान मिटा दिया गया। रोसड़ा के लोगों ने इसे भी खून का घूंट पीकर सह लिया। एक बार फिर परिसीमन आयोग का गठन होने वाला है। रोसरा के लोगों को अपनी लड़ाई के लिए पहले से तैयार रहना होगा। वर्तमान में रोसरा समस्तीपुर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है।समस्तीपुर की संसद शांभवी चौधरी ने रेलवे संसदीय समिति की जनवरी 2025 में हुई बैठक में रोसरा क्षेत्र के लोगों की अनदेखी की। उनके द्वारा बैठक में प्रस्तावित अमृत भारत एक्सप्रेस के रुसेरा घाट स्टेशन पर ठहराव की मांग नहीं की गई, जिसका परिणाम अमृत भारत एक्सप्रेस का ठहरव रुसेरा घाट स्टेशन पर नहीं हो रहा है। सांसद महोदया की उदासीनता का खामियाजा रोसरा क्षेत्र की जनता भुगत रही है। रोसड़ा में अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन के नहीं रुकने से लोग ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। रोसरा के लोग अबकी बार आर-पार करने के मूड में है। रुसेरा घाट स्टेशन पर अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन के ठहराव की मांग एक स्वाभिमान का मुद्दा बनते जा रहा है,जिसकी और सांसद तथा स्थानीय विधायक अनभिज्ञ बने हुए हैं। ऐसे में सभी पार्टियों के नेता दलीय भावना से ऊपर उठकर लड़ाई लड़ने के मूड में है। रोसरा शहर में जाम की समस्या विकराल रूप धारण किए हुए हैं। जाम की समस्या से निजात के लिए लंबे समय से बाईपास की मांग की जा रही थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समस्तीपुर में प्रगति यात्रा के दौरान रोसड़ा में बाईपास निर्माण की मांग को स्वीकार कर लिया गया। लेकिन रोसड़ा के दक्षिणी छोर पर बनने वाले बाईपास को तिकड़म से उजियारपुर संसदीय क्षेत्र में शिफ्ट कर दिया गया है। रोसरा क्षेत्र की लगातार हो रही उपेक्षा से जनता आक्रोशित है
रोसड़ा के लोग गोलबंद होने लगे हैं। इसको लेकर बुद्धिजीवी, बिजनेसमैन तथा रिटायर्ड लोगों ने सिविल सोसाइटी का गठन किया है। सिविल सोसाइटी को युवाओं का भी समर्थन मिल रहा है, जो रोसड़ा के आंदोलन को आगे लेकर जाएगी। अब देखना होगा कि अबकी बार रोसड़ा क्षेत्र की जनता का आंदोलन अपना हक ले पाती है या फिर झूठे आश्वासन से एक बार फिर इसे दबा दिया जाएगा।