BiharNationalNewsRoseraSamastipur

रोसड़ा को अपनों ने ही लूटा गैरों में कहां दम था………

NEWS DESK: रोसरा की बदहाली और बेबसी पर घड़ियाली आंसू बहाने वाले लोगों का दोहरा चरित्र सामने आने लगा है। पहले लोकसभा चुनाव से रोसड़ा संसदीय क्षेत्र था, जिसे 2008 के परिसीमन में तत्कालीन स्थानीय सांसद के स्वार्थ लोलुपता में विलुप्त कर दिया गया। रोसड़ा को समस्तीपुर का हिस्सा बनाकर उसके कद को छोटा कर दिया गया। लोजपा की सांसद शांभवी रोसरा को अब समस्तीपुर संसदीय क्षेत्र के 6 विधानसभा क्षेत्र में से एक मानती है उनकी नजर में रोसरा का कोई विशेष स्थान नहीं है। यही कारण है कि तीन महीने से अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव रोसरा में किए जाने की मांग किया जा रहा था, जिस नजर अंदाज किया गया। रोसड़ा के युवाओं के आमरण अनशन ने एक जन आंदोलन अख्तियार कर लिया। उससे घबराकर अनशन स्थल पर पहुंचकर सांसद महोदया ने दो महीने की मोहलत मांग लिया। विश्लेषक इसे राजनीतिक चालबाजी मान रहे हैं। समस्तीपुर मंडल रेल प्रबंधक भी मानते हैं कि सांसद शांभवी के रेल मंत्री से आग्रह मात्र से ही अमृत भारतीय ट्रेन का रोसड़ा में ठहराव शुरू हो जाता। लेकिन पूरे तीन महीना तक सांसद शांभवी चौधरी ने कोई पहल नहीं की। रेल मंत्री के 7 जुलाई को समस्तीपुर आगमन होने पर उन्होंने समस्तीपुर संसदीय क्षेत्र के रोसड़ा सहित अन्य कई मांगों का पिटारा उनके सामने रख दी। इससे साफ जाहिर होता है कि उनकी मंशा रोसड़ा के लोगों के मांगों के साथ नहीं थी। इस पर तुर्रा यह कि मुझे केवल रोसड़ा ही नहीं पूरा समस्तीपुर संसदीय क्षेत्र को देखना है। उनका यह कहना रोसड़ा के दुखते रंग पर हाथ रखने जैसा प्रतीत हो रहा है। राजनीतिक नेताओं का जयकारा लगाने वाले लोग आखिर कब अपने रोसड़ा के हक की लड़ाई में मुखर होंगे या यूं ही चापलूसी का दौर जलता रहेगा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *