इस्तीफा के सवाल पर देश के कोने कोने में बबाल
NEWS DESK : देश की परीक्षा सिस्टम में लीकेज से आक्रोशित युवाओं का एक महीना पहले दिल्ली के जंतर मंतर से शुरू हुआ आंदोलन पूरे देश में फैल गया है. जंतर मंतर पर आंदोलनकारी युवाओं पर हुए बर्बर लाठी चार्ज तथा बदसलूकी ने देश को झकझोर दिया. आम से लेकर खास तक पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं. केंद्र सरकार की लगातार आलोचना हो रही है. विपक्षी दल सड़क से लेकर संसद तक सरकार को घेर रही है. आंदोलन को महत्व नहीं देने वाली सरकार अब सी जे पी के प्रतिनिधि से वार्ता का प्रस्ताव दे रही है. सी जे पी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा को लेकर अड़ी है. वही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर सरकार का रबैया अड़ियल है.हालांकि सोनम वांगचुक ने सरकार की पहल पर अपना 26 दिनों से चल रहा भूख हड़ताल समाप्त कर दिया है. सरकार की ओर से डैमेज कंट्रोल की कोशिश जारी है.वहीं कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तथा गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा मांग रहे हैं. युवाओं के आंदोलन को राजनीतिक दल सियासी रंग देने लगे हैं. इन सब के बीच युवाओं की प्रमुख मांग पेपर लीक और परीक्षा में धांधली का सवाल उनसुलझा है. आखिर परीक्षा सिस्टम में लीकेज कैसे हो जाता है, सरकार इसे प्रमुखता से क्यों नहीं लेती है. पहले तथा दूसरे जे पी एस सी में हुए धांधली की अभी तक जांच ही चल रही है. सी बी एस सी की परीक्षा ढंग से नहीं हो पा रही है.नीट एग्जाम 2025 मे सारा देश पेपर लीक को लेकर चीख रहा था, सुननेवाला कोई नहीं था. बिहार से लेकर कश्मीर तक पेपर लीक की घटना हो रही है. पेपर लीक तथा परीक्षा मे धांधली से बच्चों की सालों की मेहनत पर पानी फिर जाता है, बच्चें अवसाद मे आकर आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम उठा लेते हैँ. आखिर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों हो रहा है. पेपर लीक तथा परीक्षा मे धांधली चाहे कोई करे, इसकी जबाबदेही किसकी है.सरकार के स्तर से जबाबदेही निर्धारित होनी चाहिए, जिससे पढ़ाई करने वाले बच्चों को आंदोलन करने के लिए मजबूर ना होना पड़े.
