घूसखोर अधिकारी ने बेशर्मीपन की इंतहा को दिखाया,साज़िश के तहत मुझे फसाया गया, और क्या !
NEWS DESK : बिहार में भ्रष्टाचार की जड़े काफी गहरी हो चुकी है. कोई भी सरकारी ऑफिस इससे अछूता नहीं है. चपरासी से लेकर अधिकारी तक बिना घूस लिए काम करने को तैयार नहीं है. जन्म प्रमाण पत्र से लेकर मृत्यु प्रमाण पत्र मे नाजायज पैसे की उगाही जारी है. मनरेगा से लेकर प्रखंड की हरेक योजना मे लूट मची है. भूमि सम्बन्धी मामले मे अंचल के राजस्व कर्मचारी से लेकर ऊपर तक सब भ्रस्टाचार मे डूबे हुए हैँ. राशन कार्ड बनवाने से लेकर राशन लेने तक भ्रष्टाचार चरम पर है. पी एम आवास योजना मे लिकेज की इंतहा हो गई है, पक्का मकान वाले आवास का लाभ ले रहे हैँ, वहीं जिनको मिलना चाहिए वे मुँह ताक रहे हैं. थाने मे एफ आई आर से लेकर सुपरवीज़न तक मैंनेज हो रहा है. पैसे के दम पर अपराधी खुले आम छुट्टा घूम रहा है. जनता भी मान चुकी है कि घूसखोरी के बिना उनका फ़ाइल ऊपर नहीं जाएगा.
ऐसा नहीं है कि कारवाई नहीं हो रही है. घूसखोर कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक निगरानी के हत्थे चढ़ चुके हैँ. अगर कोई घूस लेते हुए पकड़ा जाता है तो शिकायतकर्ता पर ही साज़िश करने का आरोप लगा देता है. भ्रस्टाचारी मे अब इसको लेकर कोई पछतावा तक नज़र नहीं आता है. रिश्वत लेना जैसे उनका जन्मसिद्ध अधिकार हो.घूस खोर मे पकड़े गए लोग कुछ महीनों बाद फिर से अपने जगह पर पढ़ास्थापित हो जाते हैं.घूसखोरी है कि बदस्तूर जारी है, इस पर लगाम लगाना सरकार के बस की बात नहीं दिखती है.
अभी ताजा मामला समस्तीपुर जिला के रोसड़ा अनुमंडल का है. रोसड़ा की भूमि सुधार उप समाहर्ता कंचन कुमारी झा को दो लाख रूपये तथा एक वाशिंग मशीन घूस लेते निगरानी की टीम ने 27 अगस्त 2026 को रंगे हाथों पकड़ लिया. सरकारी आवास मे डी सी एल आर कंचन कुमारी झा का दलाल सुमित कुमार भी मौजूद था. निगरानी की टीम को डी सी एल आर के आवास से 13 लाख 82 हज़ार रूपये भी नकद मिला, जिसका उनके पास कोई जवाब नहीं था. उड़ते खबरों की माने तो मैडम को बचाने की जद्दोजहद दिन भर चलती रही. निगरानी के छापा दल के सदस्य भी मीडिया के सवालों से बचते रहे . हालांकि देर रात निगरानी विभाग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मामले का पटा छेप कर दिया. घूसखोरी मे पकड़ी गई मैडम की ठसक देखकर मौजूद मीडिया कर्मी भी दंग रह गए. कंचन कुमारी झा के चेहरे से कहीं भी अपराध बोध नहीं झलक रहा था. उसने शिकायतकर्ता मनोज कुमार पर ही साज़िश के तहत फंसाने का आरोप मढ़ दिया. इसे बेशर्मीपन ही कहा जा सकता है.
बता दे कि मधुबनी की रहने वाली कंचन कुमारी झा 60-62वीं बैच की बिहार प्रशासनिक सेवा की अधिकारी हैँ. रोसड़ा मे पिछले डेढ़ साल से डी सी एल आर के पद पर कार्यरत थी.
